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अजीत सिंह
अपनी बात : अजीत सिंह


श्रद्धेय सम्मानित जन,


      आज हमारे अंत:करण मेँ आवश्यकता और स्वतंत्रता, घृणा और प्रेम, मृत्यू और जीवन के बीच संघर्ष छिडा हुआ है, दूसरे पक्ष मेँ भौतिक जगत मेँ ऊँच-नीच, अमीरी-गरीबी, शोषक-शोषित के बीच संघर्ष बना हुआ है, समस्याओँ से ग्रसित मानव जाति जितना समाधान खोजता है समस्यायेँ हल नहीँ होती अपितु संघर्ष मेँ तब्दील होने लगती हैँ, समस्यायेँ तभी सुलझ सकती है जब हम हर व्यक्ति के आंतरिक जीवन के विकास की ओर ध्यान रखते हुए राष्ट्रीय हित की ओर दृष्टिपात करने लगते हैँ! यही नज़रिया निश्चयात्मक सम्बल है जिसके बल पर टिके रहकर आम आदमी की अस्मिता को दुनिया की चकाचौँध भरी भीड मेँ खोने से बचा सकते हैँ! हमने अतीत एवम वर्तमान को चिरंतन सत्य के झरोखे से देखा है, मनुष्य का कोई विकास खुद व खुद नहीँ हो जाता, ऐसी कोई प्रणाली या स्त्रोत नहीँ जो प्राकृतिक नियमोँ के अनुसार स्वत: घटित होती हो, मनुष्य का विकास तभी होता है जब वह इसके लिए चौकस हो!

      कहने को देश आज़ाद हुआ, हम तमाम क्षेत्रोँ मेँ विकास के चरम पर भी पहुँचे पर आम आदमी ज़िन्दगी के हर पहलुओँ पर संघर्ष करता चला आ रहा है, स्थिति यह है कि गरीब और गरीब होते जा रहे हैँ, वो दाल-रोटी के जुगाड मेँ ही संघर्ष कर रहे हैँ, भ्रष्टाचार चरम पर है, नौकरशाह अकूत धन जुटाने मेँ लगे हैँ, राजनैतिक दल अपनी रोटियाँ सेकने मेँ व्यस्त हैँ, आम आदमी का प्रत्येक कदम संघर्षोँ से घिरा है! सम्प्रति आम आदमी के कदमोँ से कदम मिलाकर चलने की सोच के साथ मैँ तैयार हूँ! समाज के अतीत, वर्तमान और भविष्य के साथ-साथ आम आदमी की ज़िन्दगी के रोजमर्रा से सारोकार रखने वाले मसलोँ पर मंथन के उपरांत ही मैने समाज मेँ व्याप्त भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ एक निर्णायक आगाज का निर्णय लिया है! मैँ समाज मेँ बेहतर परिवर्तन की खातिर अमन और अहिंसा की लिबास मेँ लिपटा हुआ इंकलाबी विचारोँ का एक जब्बर्दस्त तूफान खडा करना चाहता हूँ!

      मेरी यह कोशिश होगी कि मेरे किसी भी विचार से या कार्य से न तो किसी व्यक्ति का दिल दु:खे और ना ही किसी के मान,सम्मान के महल के मेहराव और गुम्बद मेँ कोई दरार पडे या फिर समाज के दामन पर कोई दाग लगे! परंतु फिर भी अगर कभी आपको लगे कि मेरे किसी भी कार्य या विचार ने समाज के दामन पर दाग लगाने का अपराध किया है तो इसके लिए कभी भी किसी भी वक्त बतौर मुजरिम जनता की अदालत के कटघरे मेँ खडा होकर हर सज़ा कबूल करने को तैयार रहूँगा!

      बहरहाल, मैँ कितना सही हूँ और कितना गलत? यह निर्णय आपका होगा, मैँ समाज की सेवा करने योग्य हूँ अथवा नही? यह निर्णय भी आपका होगा, भ्रष्ट व तानाशाही व्यवस्था के खिलाफ जंग मेँ आपके सहयोग व समर्थन की आकांक्षा के साथ...

जय हिन्द!